हाइपरटेंशन और हाई ब्लड प्रेशर में क्या अंतर है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 16:34

हाइपरटेंशन (Hypertension)

उच्‍च रक्‍तचाप के प्रकारउच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणउच्‍च रक्‍तचाप का कारण और जोखिम कारकउच्‍च रक्‍तचाप से बचाव या रोकथामहाई ब्‍लड प्रेशर की पहचान कैसे करेंहाई ब्‍लड प्रेशर का उपचारलाइफस्टाइलहाइपरटेंशन का उपचाररोग का निदान और खतरेवैकल्पिक उपचार

हाई ब्लड प्रेशर को मेडिकल भाषा में हाइपरटेंशन कहते हैं। इसे हिंदी में उच्च रक्तचाप कहा जाता है। दरअसल, ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर रक्त द्वारा लगाया गया बल होता है। हमारा हृदय ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाने के लिए रक्‍त वाहिकाओं की मदद लेता है, जिसे धमनियों के नाम से जाता है। धमनियों पर जब दबाव बढ़ जाता है तो इसे ही उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं। यह एक सामान्‍य शारीरिक समस्‍या है, लेकिन ये समस्‍या जब बढ़ जाती है तो यह हृदय रोग और अन्‍य बीमारियों का कारण बनता है। ब्लड प्रेशर दो नंबरों से बना हुआ है जिसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के नाम से जाना जाता है। सिस्टोलिक प्रेशर हृदय के धड़कने पर दबाव का माप होता है, जबकि डायस्टोलिक प्रेशर दो धड़कनों के बीच में दबाव का माप होता है। इन दोनों को ही मरकरी प्रति मिलीमीटर (mmHg) में मापा जाता है। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी की सामान्य रीडिंग 120/80 mmHg है। उच्च रक्तचाप होने की पुष्टि तक की जाती है जब सिस्टोलिक रीडिंग 140 mmHg और डायस्टोलिक रीडिंग 90 mmHg से अधिक या बराबर होती है।

वैश्विक स्तर पर, चार व्‍यक्तियों में से एक को हाइपरटेंशन है। लगभग 3 अरब 50 करोड़ लोगों का ब्‍लड प्रेशर लेवल 110-115 mmHg से अधिक है, और 87 करोड़ 40 लाख लोगों का सिस्टोलिक ब्‍लड प्रेशर 140 mmHg से अधिक है। भारत में 20 करोड़ से ज्‍यादा लोग उच्च रक्तचाप के शिकार हैं। भारत में मौजूद कुल उच्च रक्तचाप के मरीजों की अधिकांश आबादी शहरी है (शहर की कुल आबादी का 25%-30%) और ग्रामीण आबादी में 10%-20% व्‍यक्ति हाई बीपी वाले हैं।


उच्‍च रक्‍तचाप के प्रकार

आमतौर पर सामान्य ब्‍लड प्रेशर लेवल 120/80 mmHg से कम या बराबर होता है। 120/80 और 129/89 mmHg के बीच बीपी रीडिंग वाले लोगों को प्री-हाइपरटेन्सिव माना जाता है; इन लोगों में बीपी उतना कम भी नहीं है जितना होना चाहिए मगर उच्च रक्तचाप नहीं माना जाता है।

उच्च रक्तचाप के दो स्‍टेज हैं:

स्टेज I: जब बीपी रीडिंग 130/80 mmHg हो।
स्टेज II: जब बीपी रीडिंग 130/80 mmHg से अधिक या बराबर हो।


अगर ब्‍लड प्रेशर का स्‍तर 180/110 mmHg से अधिक है तो इस स्थिति को हाइपरटेंसिव क्राइसिस यानी उच्च रक्तचाप को संकट ग्रस्‍त माना जाता है और मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा लेने की सलाह दी जाती है।

उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षण

उच्च रक्तचाप या हाई ब्‍लड प्रेशर को एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है; इसलिए बीपी को नियमित रूप से मापा जाना चाहिए, क्योंकि उच्च रक्तचाप में कोई चेतावनी लक्षण या संकेत नहीं होते हैं, और कई लोगों को यह पता नहीं होता है कि उन्‍हे हाइपरटेंशन है। कुछ रोगियों को उच्च रक्तचाप के बिना भी हृदय या किडनी रोग हो सकता है।

उच्च रक्तचाप से जुड़े कुछ लक्षणों में शामिल हैं:

सिरदर्द
नाक से खून आना
दृष्टि दोष
हार्ट रेट का बढ़ जाना
छाती में दर्द
कानों में भनभनाहट की आवाज सुनाई देना
उल्टी
भ्रम की स्थिति
चिंता
मांसपेशियों में कंपन्‍न

उच्‍च रक्‍तचाप का कारण और जोखिम कारक

कारण

सेकेंड्री हाइपरटेंशन होने के कुछ निम्‍नलिखित कारण हो सकते हैं:

क्रॉनिक किडनी डिजीज
डायबिटीज
अवरुद्ध धमनियां (रीनो वेस्कुलर डिजीज)
कुशिंग्ज सिंड्रोम
थायराइड रोग
नींद से जुड़ी समस्‍याएं
गर्भावस्था
संकीर्ण रक्त वाहिका जो गुर्दे को रक्त की आपूर्ति करती है
डिकंजेस्टेंट्स (सर्दी खांसी की दवा), एंटीडिप्रेसेंट (अवसाद कम करने वाली दवाएं), बर्थ कंट्रोल पिल्‍स (गर्भ निरोधक दवाएं) और दर्द निवारक जैसी कुछ दवाएं शरीर के लिए बीपी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं।


जोखिम

कुछ कारक हैं जो उच्च रक्तचाप के खतरे को बढ़ाते हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है।

वे जोखिम कारक जिनमें बदलाव संभव है:

एक ऐसा अनहेल्‍दी खाना जिसमें अत्यधिक सोडियम (Na) होता है और पोटैशियम (K), उच्‍च वसा, फलों और सब्जियां शामिल नहीं हैं।
मोटापा या अधिक वजन
व्यायाम की कमी
कैफीन, शराब और तंबाकू का बहुत अधिक सेवन।
कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी अवैध दवाओं का उपयोग। नींद की कमी।


वे जोखिम कारक जिन्‍हें परिवर्तित नहीं किया जा सकता है:

उम्र: रक्त वाहिकाएं उम्र के साथ मोटी हो जाती हैं, जिससे ब्‍लड प्रेशर में वृद्धि होती है। मिडिल एज वाले पुरुषों में संभवतः महिलाओं की तुलना में उच्च रक्‍तचाप ज्‍यादा देखा गया है, जबकि बुजुर्गों की बात करें तो महिलाओं में उच्च रक्‍तचाप विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
उच्च रक्तचाप और आनुवांशिकी का पारिवारिक इतिहास।
तनाव

उच्‍च रक्‍तचाप से बचाव या रोकथाम

ज्यादातर लोग साधारण जीवन शैली में बदलाव करके उच्च रक्तचाप को रोक सकते हैं:

कुछ आसान एक्‍सरसाइज जैसे तेज चलना और वे व्‍यायाम जो हृदय के लिए फायदेमंद हैं।
शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
अपने आहार में पोटेशियम और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
फलों, सब्जियों, और साबुत अनाज जैसे कम वसा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
प्रति दिन 1500 मिलीग्राम से कम नमक का सेवन बनाए रखें।
खूब पानी पिए।
शराब का सेवन पुरुषों में प्रति दिन दो और महिलाओं में प्रति दिन एक पैक तक सीमित करें।
धूम्रपान से बचें।
योग, ध्यान, संगीत और व्यायाम की मदद से तनाव को दूर करें।
नियमित अंतराल पर अपने ब्‍लड प्रेशर की जांच करते रहें।

हाई ब्‍लड प्रेशर की पहचान कैसे करें

वैसे तो शुरुआत में होने वाला हाइपरटेंशन कोई लक्षण नहीं दिखाता है। इसलिए आपको समय- समय पर अपना बीपी चेक करवाते रहना चाहिए। बीपी चेक करने के लिए आपके डॉक्टर स्फिग्मोमैनोमीटर (रक्‍तचाप मापी) और स्टेथोस्कोप का प्रयोग कर सकते है। आजकल बीपी को वेरिफाई करने के लिए इलेक्ट्रिक सेंसर भी उपलब्ध हैं। इसके साथ-साथ डॉक्टर आपका खान पान, बीपी की फैमिली हिस्ट्री और आप कितने एक्टिव रहते हैं यह सब चेक कर सकते है। मरीज को तब डायग्नाइज किया जाता है जब लगातर दो रीडिंग में उनका बीपी हाई होता रहे। इसके अलावा मरीज का ब्लड टेस्ट भी किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसे किडनी या हृदय की बीमारी तो नहीं, इसी बहाने उसका डायबिटीज (शुगर लेवल) भी चेक किया जाता है। अगर आपके डॉक्टर सही से डायग्नोज करते हैं तो इससे आपका हाई बीपी कम होगा और इससे जुड़े रिस्क फैक्टर्स की संभावना भी कम होने लगेगी।
हाई ब्‍लड प्रेशर का उपचार

आपके डॉक्टर आपको कोई भी उपचार बताने से पहले कुछ फैक्टर्स जैसे आपकी उम्र, मेडिकल हिस्‍ट्री (कही आपको पहले से ही कोई बीमारी तो नहीं है), जो आप दवाइयां खा रहे है यह सब चेक करेंगे।

प्री हाइपरटेंसीव लोगों को बीपी कम करने के लिए कुछ लाइफस्टाइल बदलाव करने को सुझाया जाता है।
स्‍टेज-1 में लाइफस्टाइल में बदलावों के साथ-साथ अगर बीपी 130/80 और 140/90 mmHg के बीच रहता है तो बीपी को कम करने के लिए आपको दवाइयां भी दी जा सकती हैं।
स्टेज- 2 में लाइफस्टाइल बदलाओं के साथ साथ आपको दो प्रकार की दवाइयां दी जाती हैं, जिसमें से एक डाइयूरेटिक होती है।


गंभीर हाइपरटेंशन को एक दवाई नियंत्रित नहीं कर सकती है इसलिए दो या अधिक दवाइयों को साथ में जोड़ा जाता है। दो दवाइयों को साथ में देने से साइड इफेक्ट भी कम होते हैं और आपका बीपी भी कम होता है।

जिन मरीजों को कोई कंटामिटेंट बीमारी नहीं है, उन्हें निम्न दवाई सुझाई जाती है।

60 साल के कम लोगों को एंजियोटेंसन रिसेप्ट्रर ब्लॉकर्स दी जाती है। इसके साथ ही कैल्शियम चैनल ब्लॉकर भी कॉम्बिनेशन थेरेपी के दौरान प्रयोग की जा सकती है। इस थेरेपी में डायरेटिकस को भी एक तीसरी ड्रग के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
60 साल से ऊपर के लोगों में डायरेटिक्स के साथ-साथ सीसीबी को फर्स्ट लाइन उपचार में दिया जा सकता है।
छोटी उम्र के लोगों में जिन्हें हाई रेनिन हाइपरटेंशन है, उन्हें ARB और न्यू बेटा ब्लॉकर देने की सुझाई गई है।


जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी रोग जैसी पहले से ही बीमारी हैं, उन्हें निम्न सुझावों का पालन करना चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों को डाइयूरेटिक के साथ ACE इन्हिबिटर दी जा सकती हैं।
हार्ट फेलियर के मरीजों को ACE इन्हिबिटर के साथ साथ डायरेटिक्स, बेटा ब्लॉकर भी दी जा सकती हैं।
हृदय रोग वाले बीपी के मरीजों को बेटा ब्लॉकर, ACE इन्हिबिटर और कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स दी जा सकती है।

लाइफस्टाइल

अगर आप कुछ लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं तो इससे आपको दवाइयां लेने की आवश्यकता कम होगी।

सोडियम का सेवन कम करने और पोटेशियम का सेवन अधिक करने से आपका बीपी कम हो सकता है।
पोटैशियम के सप्लीमेंट लेने की बजाए आप फल और सब्जियां खा सकते हैं जिनमें पोटैशियम की मात्रा अधिक हो।
नियमित रूप से थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करना जैसे ब्रिस्क वॉक करना बीपी के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है।
मोटे लोगों को लो कैलोरी डाइट और एक्सरसाइज करनी चाहिए।
योग, मेडिटेशन आदि तकनीकों का प्रयोग करके स्ट्रेस कम करें।


इन बदलावों के साथ साथ आपको अपनी डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां भी नियमित रूप से लेनी चाहिए।

हाइपरटेंशन का उपचार

बीटा ब्लॉकर :

यह दवाइयां आपकी धड़कन की स्पीड और फोर्स कम करके काम करती है।

डाइयूरेटिक्‍स :

यह शरीर से अधिक नमक और अधिक फ्लूइड की मात्रा कम करती है।

ACE इन्हिबिटर :

यह उस केमिकल को सिंथेसिस होने से रोकती है जो आपकी आर्टरी वॉल्स को संकीर्ण करता है।

कैल्शियम चैनल ब्लॉकर :

यह दवा कैल्शियम को कार्डिएक मसल में जाने से रोकती है।
रोग का निदान और खतरे

रोग का निदान

जीवनशैली में कुछ बदलाव करके और उचित दवाइयां लेकर मरीज आसानी से बीपी को नियंत्रित कर सकते हैं। बीपी को नियंत्रित न कर पाने पर रोगियों के सामने दूसरी परेशानी खड़ी हो सकती है:

दिल का दौरा
दृष्टि दोष
स्‍ट्रोक
पैरों, पेट और पेल्विक एरिया में अपर्याप्त रक्त की आपूर्ति


जटिलताएं

अगर आप बीपी को समय पर नियंत्रित नहीं करते हैं तो उससे आपको बहुत सी मुश्किलें देखने को मिल सकती हैं जैसे :

छाती में दर्द होना
ऑक्सीजन की कमी होने के कारण हार्ट अटैक आना।
जब आपका हृदय पर्याप्त ब्लड पंप नहीं कर पाता है उसकी वजह से हार्ट फेलियर होना।
अनियमित धड़कन
दिखने में समस्या आना।
स्ट्रोक
किडनी फेलियर
अचानक से मृत्यु होना

वैकल्पिक उपचार

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए सप्‍लीमेंट और वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। हालांकि, उच्च रक्तचाप के लिए कोई भी उपचार शुरू करने से पहले एक औषधीय चिकित्सक से परामर्श करना हमेशा बेहतर होता है।

उच्च रक्तचाप के लिए कुछ वैकल्पिक उपचार इस प्रकार हैं:

डार्क चॉकलेट
कोको बीन्स से प्राप्त डार्क चॉकलेट फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स से युक्‍त होता है। डार्क चॉकलेट की कम मात्रा के सेवन से बीपी में कमी और रक्त के कार्यों में सुधार हो सकता है।


तनाव कम करने के लिए कुछ उपाय

तनाव को कम करने के लिए तन और मन से जुड़ी कुछ तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है।

कुछ पारंपरिक तकनीक जिसमें श्वास, ध्यान और अन्‍य मूवमेंट शामिल हैं।
सांस लेने की धीमी तकनीक।
ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन जिसमें एक व्यक्ति दिन में दो बार बैठता है और आंखों बंद कर मंत्रोच्‍चार करना है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info